केरल का जन्म: केरल पिरावी का अर्थ और उसकी महत्ता।
Written By: Palak Tripathi
केरल पिरावी को केरल दिवश भी कहते हैं यह दिवस हर साल 1 नवंबर को सेलिब्रेट किया जाता है।
फोटो सौजन्य: PIB
1 November 1956 मलयालम भाषी क्षेत्रों के एकीकरण से केरल राज्य के गठन की वर्षगांठ का प्रतीक है इस दिन को केरल
की सांस्कृतिक विरासत, इतिहास और एकता का उत्सव मनाया जाता है केरल पिरावी केरल के लोगों के लिए अपने राज्य की एकता, समृद्ध संस्कृति और प्रगति का जश्न मनाने का दिन है।
केरल पिरावी के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने केरल पिरावी के अवसर पर केरल के लोगों को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं।
मोदी ने कहा कि केरल के लोगों ने विभिन्न क्षेत्रों में विश्व स्तर पर उत्कृष्टता हासिल की है और अपनी रचनात्मकता तथा नवाचार के लिए जाने जाते हैं।
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उन्होंने कहा कि राज्य के मनोरम दृश्य और सदियों पुरानी विरासत भारत की जीवंत सांस्कृतिक भव्यता को दर्शाती है। साथ ही प्रधानमंत्री ने केरल के लोगों के अच्छे स्वास्थ्य और निरंतर सफलता की कामना की।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा
"केरल पिरावी की हार्दिक शुभकामनाएँ! यह एक ऐसा राज्य है जिसके लोग विश्व स्तर पर विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्टता हासिल कर रहे हैं और अपनी रचनात्मकता के साथ-साथ नवाचार के लिए भी विशिष्ट पहचान बना चुके हैं। राज्य के मनोरम दृश्य और सदियों पुरानी विरासत भारत की जीवंत सांस्कृतिक भव्यता को
दर्शाती है। केरल के लोगों को सदैव अच्छे स्वास्थ्य और सफलता का आशीर्वाद मिले।