SES बाबा नेभराज स्कूल में English Showcase ने सबको चौंका दिया |


रिपोर्ट: दीपक शर्मा । लाइव न्यूज100

लाजपत नगर, दिल्ली, 18 नवम्बर 2025 — दिल्ली के सरकारी सहायता प्राप्त SES बाबा नेभराज सीनियर सेकेंडरी स्कूल** में आज एक ऐसा नज़ारा दिखा जिसने साबित कर दिया कि अगर मंच मिल जाए तो सरकारी स्कूलों के बच्चे भी कमाल कर सकते हैं।

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आज स्कूल में आयोजित स्टूडेंट लर्निंग शोकेस ने अंग्रेज़ी सीखने को एकदम जीवंत बना दिया। Edspectrum Foundation और Shahi Exports की शिक्षणम् CSR पहल के तहत हुए इस कार्यक्रम में कुल 50 छात्रों ने अपनी सीख को मंच पर उतारा।

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दो हफ़्तों की तैयारी बच्चों द्वारा खुद चुनी गई एक्टिविटीज और फिर Listening, Speaking, Reading और Writing के कौशलों को शानदार अंदाज़ में पेश करने का मौका।
सबसे खास बात—पूरा आयोजन स्टूडेंट-लैड था।
बच्चों ने खुद स्क्रिप्ट लिखी खुद प्रस्तुति तैयार की और मेहमानों व शिक्षकों के सामने बेझिझक आत्मविश्वास के साथ बोले।

Edspectrum की टीम ने उन्हें पूरी प्रक्रिया में मार्गदर्शन दिया—फीडबैक दिया और चिंतन करवाया, ताकि बच्चे सीखें भी और आगे बढ़ें भी।

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कार्यक्रम में सिंधी एजुकेशन सोसाइटी के सदस्य भी मौजूद रहे, जिन्होंने करीब से देखा कि निरंतर अभ्यास और सही वातावरण किस तरह वंचित समुदाय के बच्चों में अंग्रेज़ी को लेकर आत्मविश्वास भर सकता है।

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Edspectrum Foundation की टीम—जहान्वी दास, जसलीन कौर, गंगान्शु शर्मा, विशाल गुप्ता, पूजा मौर्य, भविका शर्मा, पूनम नैण, शाहिद, नाज़ परवीन और संस्थापक एवं CEO पियूष जैन—कार्यक्रम में मौजूद रहे।

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Shahi Exports की ओर से CSR मैनेजर रॉबिन रवि श्री गुरुप्रसाद, श्रीमती प्रेमलता और सुश्री मेधा ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

आज का शोकेस इस बात का सबूत बना कि सही दिशा में किया गया निवेश, सीधे छात्र की ग्रोथ में बदल जाता है।
अभिभावकों और पूरे समुदाय ने देखा कि जब बच्चों को बोलने, सीखने और नेतृत्व करने का मौका मिलता है तो वे कितनी दूर तक उड़ान भर सकते हैं।

अक्षरा इंग्लिश स्किल बिल्डिंग प्रोग्राम जिसे Shahi Exports और Edspectrum Foundation मिलकर चला रहे हैं, ऐसे ही हजारों बच्चों के लिए अंग्रेज़ी दक्षता की मजबूत नींव खड़ी कर रहा है—और SES बाबा नेभराज स्कूल में सीखने की संस्कृति को और सशक्त बना रहा है।

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कार्यक्रम का अंत तालियों की गड़गड़ाहट के साथ हुआ—बच्चों की आँखों में चमक थी… और स्कूल के माहौल में उम्मीदों का उजाला।

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